सरदारपुर। क्षेत्र में सिस्टम की बड़ी खामी यही हैं की जब तक कोई बडा हादसा नही हो जाता तब तक जवाबदारो के निंद नही टूटती है। ऐसा ही मामला सरदारपुर में जल संसाधन उपसंभाग सरदारपुर में देखने को मिल रहा है। पिछले दो वर्षो से भी अधिक समय से सरदारपुर में विभाग का कार्यालय अंधेर नगरी चोपट राजा की तर्ज पर संचालित हो रहा है। विभाग में कई पद खाली पड़े हैं साथ ही एसडीओ के पद पर स्थाई प्रभार नही होने से किसानों की समस्याओ का समाधान समय पर नही हों पा रहा है। विभागीय लापरवाहियों का खामियाजा किसानों को भुगतान पड़ता हैं। ग्राम मौलाना का तालाब भी विभागीय लापरवाही के चलते फुटा था जिससे किसानों की सैकड़ो बिघा फसल पानी में बह गए थी।
ग्राम मौलाना तालाब कि तरह ही रिंगनोद के लखा घाटी तालाब की पाल पिछले एक वर्ष से जीर्ण-शीर्ण हो चुकी हैं। पिछले वर्ष तालाब की पाल की मरम्मत को लेकर किसानो ने 30 मई 2025 को जल संसाधन विभाग के एसडीओ, एसडीएम और जिला कलेक्टर को जनसुनवाई मे आवेदन देकर मरम्मत की मांग की की थी। जिस पर एसडीएम ने जनपद पंचायत सीईओ को मौका मुआयना कर प्रतिवेदन देने को कहा था। साथ ही विधायक प्रताप ग्रेवाल ने भी एसडीएम को पत्र लिखकर उक्त तालाब की क्षतिग्रस्त पाल की मरम्मत करने की बात कही थी। लेकिन हालात यह हैं कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी जल संसाधन विभाग ने अब तक कोई सुध तक नही ली है।

ऐसे में एक बार फिर किसानों को अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ रहे है। शुक्रवार को भारतीय किसान युनियन (टिकेत) के बैनर तले एसडीएम के नाम ज्ञापन तहसीलदार मुकेश बामनिया को सौपा गया। ज्ञापन में तालाब की क्षतिग्रस्त पाल की शिघ्र मरम्मत की मांग की गई। यूनियन के जिलाध्यक्ष राकेश सोलंकी ने कहा कि कई बार आवेदन देने के बाद भी तालाब की पाल पर सुधार कार्य नही किया गया। जिससे रिंगनोद के कई किसानों की भूमि दाव पर लगी है, यदी तालाब की पाल फूटती है तो किसान की फसल सहित भूमि को भी नुकसान होना संभव हैं। उन्होंने कहा कि यदि तालाब की पाल को सुधारा नही गया तो 13 अप्रैल सुबह 11 बजे किसानों के साथ चक्काजाम किया जाएगा। ज्ञापन के दौरान शांतिलाल, अशोक, फूलचंद, प्रकाश, लक्ष्मण, गोविंद सहित अनेक किसान मौजूद रहें।


















