सरदारपुर – ग्रामीण अंचलों में शिक्षा का हाल-बेहाल, कलेक्टर के भ्रमण के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार, कार्यालयों में बैठकर कागजों तक सीमित जिम्मेदारी, ग्राम बांडीखाली का स्कूल बयां कर रहा हकीकत

सरदारपुर। ग्रामीण अंचलो मे प्राथमिक शिक्षा के हाल खस्ता दिखाई दे रहे है। सरकार लाख चाहे लेकीन अंचलो मे शिक्षा व्यवस्था मे सुधार नही हो पा रहा है। भवन के कक्ष में बच्चों के प्रवेश के लिए चढ़ाव तक नहीं है वहीं कक्ष जर्जर भी हो रहे है। बच्चो को मिलने वाला मध्यान भोजन भी अव्यवस्थाओ की भेंट चढता दिखाई दे रहा है। जिनके जिम्मे मॉनिटरिंग की जवाबदेही है वह धरातल को देखें बिना अपनी जवाबदारी को कागजो तक सीमित रखना प्रतीत हो रहा है।

सरदारपुर क्षेत्र का कुछ माह पुर्व कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने औचक निरीक्षण किया था जिसमे लापरवाही सामने आई थी। कलेक्टर के भ्रमण के बाद जरूर दिखावे के तौर पर जवाबदारो ने कुछ दिन मैदानी भ्रमण कर अपने कर्तव्य की इतिश्री की। जब की धरातल पर स्कूल अपनी आपबीती कुछ और ही बयां कर रहा है।

तहसील मुख्यालय से कुछ किमी की दुरी पर स्थित ग्राम बाण्डीखाली के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कई लापरवाही सामने दिखाई दे रही है। विद्यालय मे बच्चो के साथ शिक्षक भी उपस्थित हो रहे हैं। लेकिन यहां लापरवाही दिखाई दे रही है। जिस कछ में छोटे-छोटे बच्चे बैठ कर भविष्य को संवारने का कार्य करते हैं उस कक्ष में अंदर प्रवेश करने के लिए चढ़ाव (सीढीया) व रेंप तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में छोटे बच्चों को कक्ष में पहुंचने के लिए करीबन दो फिट की उंचाई चढ़ने में परेशानी उठाना पड़ती है। वहीं स्कूल की छुट्टी के दौरान बच्चे भाग कर घर लौटते हैं उस समय बच्चों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। वहीं स्कूल परिसर के जिस भवन मे आफीस है उसकी छत जर्जर होकर हादसे को न्यौता दे रही है। डर के बीच शिक्षक इसी रूम मे बैठकर अपना आफीस कार्य भी करते है। अब यह भी देखना होगा कि स्कूलों में व्यवस्था को लेकर दी जाने वाली राशि का उपयोग कहा किया गया है।

मध्यान्ह भोजन में भी लापरवाही
मध्यान भोजन की बात करे तो मध्यान भोजन योजना के जवाबदारो की लापरवाही भी सामने आई। बच्चो ने बताया कि कभी कभार एवं झंडे ( राष्ट्रीय पर्व) के दिन खीर पुडी मिलती है। जबकी मीनु चार्ट के अनुसार प्रति मंगलवार को बच्चो को खीर पुडी का वितरण किया जाना है लेकीन ऐसा नही होता। वही विद्यालय मे लगा आरओ सिस्टम पानी के अभाव में धुल खा रहा है क्योकी विद्यालय मे जो ट्युबवेल लगा है वह सुखना बताया गया है। विद्यार्थीयो को खुद ही हैंडपंप पर जाकर पानी पीना पडता है। खैर यह तो बाण्डीखाली विद्यालय के हाल है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वरिष्ठ अधिकारी क्षेत्र के स्कूलों का निरीक्षण कर बच्चों की पीढ़ा को जानेंगे।

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