कथा वाचक श्री भारद्वाज ने कहा – अपने धर्म को छोड़कर कही नहीं जाना, कोई भटक गया तो उसकी घरवापसी की जिम्मेदारी भी आपकी हैं
रिंगनोद। ग्राम पंचायत गुमानपुरा के ग्राम मवड़ी में सिद्ध क्षेत्र सुराई माता स्थित महादेव मंदिर पर श्री शिव चरित्र कथा का पंच दिवसीय महोत्सव माताजी मंदिर राजगढ़ के ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम जी भारद्वाज के मुखारविंद से शनिवार को कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुआ। पहले दिन कथा का श्रवण करने बड़ी संख्या में क्षेत्र के विभिन्न गांवो से ग्रामीण पहुंचे।
कलश यात्रा की शुरुआत प्रातः गुमानपुरा स्थित श्रीराम मंदिर से प्रारंभ हुई। जो गांव में भ्रमण कर कथा स्थल पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में बालिकाएं व युवतियां सिर पर कलश धारण किए हुए निकली। वही बड़ी संख्या में युवा वर्ग हाथों में धर्म ध्वज लेकर निकले। यात्रा का अनके स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रभर से ग्रामीण शामिल हुए।

श्री शिव चरित्र कथा पंच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन कथा का वाचन करते हुए ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तमजी भारद्वाज ने कहा कि आज के समय में युवा धर्म से दूर होकर व्यसन ओर दूसरी आदतों में लिप्त होता जा रहा हैं। लेकिन गुमानपुरा क्षेत्र के युवाओं ने धर्म की और कदम बढ़ाते हुए इस धार्मिक आयोजन में ना केवल अपनी रुचि बढ़ाई बल्कि इस धार्मिक आयोजन को किया हैं।
कथा वाचक श्री भारद्वाज ने कहा कि हमारा सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ धर्म हैं। इसके ज्ञान का आधार हमारे वेद, पुराण, रामायण और भगवद गीता जैसे पवित्र ग्रंथ हैं। लेकिन फिर भी कुछ लोगो के बहकावे में आकर अपने ही भाई-बंधु अपना धर्म छोड़ रहे हैं। जब इतने श्रेष्ठ धर्म में हमारा जन्म हुआ है तो फिर हम हमारा धर्म क्यो रास्ते से भटक रहे हैं, हमे हमारे धर्म के प्रति पूरी श्रद्धा व आस्था रखना हैं। धर्म परिवर्तन के नाम पर कोई कितना भी प्रलोभन दे किंतु हमें हमारे धर्म के प्रति अडिग रहना है। उन्होंने कथा श्रवण करने पहुंचे श्रद्धालुओं से कहा कि कोई आपकी पहचान वाला अपने धर्म से भटक गया है तो उसकी घरवापसी की जिम्मेदारी भी आपकी है।

प्रतिदिन होंगे विभिन्न आयोजन –
पंच दिवसीय महोत्सव ग्राम मवड़ी, गुमानपुरा, फुलझर, खलवा, पातरुंडी व ढाकनबारी के ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है। पहले दिन सभी गांवो से बड़ी संख्या में ग्रामीण कथा श्रवण करने पहुंचे थे। महोत्सव के प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। वही 11 फरवरी को कथा समापन पर महाप्रसादी का आयोजन भी होगा।



















