रिंगनोद। चातुर्मास काल में छोटी से छोटी तपस्या का लाभ मिलता है लेकिन कब जब हम वह धर्म आराधना तपस्या प्रार्थना शुद्धता के साथ शुद्ध मन से करते हैं तभी हमारे ध्दारा की गई धार्मिक क्रियो एवं तपस्या का लाभ मिलता है जिससे हमारा मन शांत सहज एवं प्रसन्न रह सकता है। उक्त रिंगनोद में यहां पर चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी श्री विज्ञान लता श्री जी ने जैन धर्मशाला में कहे तथा चातुर्मास काल में श्रावक श्राविकाओं के कर्तव्य को भी समझाया इससे पूर्व साध्वी श्री जी की मंगलाचरण से धर्मसभा प्रारंभ हुई उसके पश्चात श्री रत्नविजय जी महाराज साहब ध्दारा रचित श्रावक श्राविकाओ के कर्तब्य पुस्तक सुनील कुमार अमन कुमार समस्त मेहता परिवार तथा श्री भद्रगुप्त सुरीश्वर जी महाराज साहब द्वारा रचित प्रीत करे दुख होई चरित्र नमक ग्रंथ कमल चंद रजत कुमार उज्जवल कुमार फुलफगर परिवार द्वारा साध्वी श्रीजी को वोहराने का लाभ लिया गया था। दोनों परिवार द्वारा पूजन कर ज्ञान की आरती की गई चरो महीने इन ग्रंथो पर ही प्रवचन रहेंगे तथा इन प्रवचनों के आधार पर प्रतिदिन प्रश्नोत्तरी भी होगी सही उत्तर देने वाले को पुरस्कार दिया जाएगा।
वही साध्वी श्री स्वरलता श्रीजी महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जीवात्मा का अंतिम लक्ष्य मोक्ष होता है लेकिन उसे पाने के लिए हमारे द्वारा की गई एक समय की सामायिक ही काफी होती है। आज के युग में व्यक्ति इस शरीर को तो बहुत ही सजा कर संवार कर रखता है लेकिन इस आत्मा को संवारने का एकमात्र ही रास्ता वह धर्म आराधना सच्चे मन से करना है।
श्री संघ अध्यक्ष आशीष पवार ने धर्म सभा को जानकारी देते हुए बताया कि यहां पर 4 तारीख से सिध्धी तप की तपस्या प्रारंभ होगी। तपस्याओं के पारणे एंव स्वामीवात्सल्य करवाने का लाभ कमल कुमार, विशाल, रिषभ, शुभम डूंगरवाल परिवार द्वारा लिया गया है तथा नवदिवसीय नमस्कार महामंत्र आराधना के लाभार्थी चिराग कुमार भव्य कुमार पुण्य कुमार एवं समस्त भंसाली परिवार रिंगनोद द्वारा ले जाने की श्री संघ से अनुमति मांगी। जिस पर श्रीसंघ ने सहमती दी।


















