सरदारपुर। पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर हमेशा सवाल किए जाते रहते है लेकिन आमजन की सुरक्षा मे सदैव तत्पर रहने वाली पुलिस की सहृदयता भी काबीले तारीफ रहती है। 6 माह पूर्व एक पति के द्वारा पत्नी को मारपीट कर घर से निकाल दिया यही नही डेढ़ साल की बच्ची को भी अपने पास रख लिया। 6 माह से बेटी के वियोग मे तड़प रही महिला सोमवार को जिला मुख्यालय पर नवागत पुलिस अधिक्षक सचिन शर्मा के पास पहुँची और अपने पति से बच्ची को दिलाने की गुहार लगाई।
पुलिस अधीक्षक ने महिला की बातो को गंभीरता से सुना और सरदारपुर एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार को उक्त मामले मे तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। एसपी शर्मा से मिले निर्देशों के बाद एसडीओपी परिहार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक्शन लिया और अमझेरा थाना प्रभारी राजु मकवाना को संबंधित पक्षों को तलब कर कार्यालय पर बुलाया। जहां पर शिकायत के महज 4 घंटे के भीतर ही बच्ची को महिला के सुपुर्द कर दिया। 6 माह से अपनी बेटी के वियोग में तडप रही महिला अपनी बच्ची को पाकर खुश दिखाई दी।
यह था मामला – शिकायत कर्ता महिला का ससुराल ग्राम रूपारेल है जहा पर उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था तथा उस पर बिना वजह शक करता था। करीब छः महिने पहले उसके पति ने मारपीट कर उसे अपने घर से निकाल दिया और उसकी डेढ साल की बच्ची उससे छीन ली। वह दुखी मन से अपने मायके लेड़गांव चली गई लेकिन उसका अपनी बच्ची के बिना मन नही लग रहा था। वह अपनी नन्ही बच्ची को वापस पाने के लिये परेशान थी। जिसकी शिकायत को लेकर महिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय धार पहुंची जहां पर एसपी ने एसडीओपी सरदारपुर को शिकायत जांच कर त्वरित निराकरण के निर्देश दिए गए। पुलिस के द्वारा दोनों पक्षों को बुलाकर सुना गया। विष्णु ने दुसरी शादी कर ली है।
महिला के पति विष्णु को बताया गया कि इतनी छोटी दुध पीती बच्ची को उसकी मां से अलग रखना उचित नही है। पहले ना-नुकुर करने के बाद समझाने पर विष्णु बालिका को अपनी पत्नी को सौंपने के लिए तैयार हो गया गया और उसने बच्ची को पत्नी पूजा को सौंप दिया। पूजा अपनी बच्ची को पाकर खुश हो गई और उसने इतनी जल्दी सुनवाई होने पर पुलिस को धन्यवाद दिया। इस कार्यवाही में थाना प्रभारी अमझेरा राजु मकवाना, उप निरीक्षक प्रमोद चौहान, सहायक उप निरीक्षक कमलेश्वर तिवारी, प्रधान आरक्षक रामकृष्ण गामड़, एसडीओपी कार्यालय के सहायक उप निरीक्षक विमल कुमार त्रिपाठी तथा आरक्षक मुकेश बारिया का योगदान रहा।

















