राजगढ़ में सोयायटी ग्राउंड पर श्रीराम कथा का आयोजन जारी, श्रद्धा और भक्ति का वातावरण चरम पर

कथा वाचक श्री भारद्वाज ने कहा- मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन दिशा देने वाली प्रथम गुरु होती है

राजगढ़। नगर के मार्केटिंग सोसाइटी ग्राउंड पर आयोजित श्री राम कथा के सातवें दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण चरम पर रहा। कथा वाचक ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने भगवान श्री राम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम ने धनुष नहीं, बल्कि घमंड को तोड़ा था और अपनी माता का नाम ऊंचा किया। धनुष के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जैसे ही धनुष टूटा, उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी और उसी समय भगवान परशुराम का आगमन हुआ। आगे उन्होंने बताया कि भगवान परशुराम भी अंततः प्रभु राम की महिमा को स्वीकार करते हुए उनकी स्तुति में लीन हो गए।

श्री भारद्वाज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को नम्रता के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि जीवन में नम्रता अपनाने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। जो व्यक्ति विनम्र रहता है, उसे जीवन में कम बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जबकि अहंकार और घमंड व्यक्ति के बने-बनाए कार्यों को भी बिगाड़ देते हैं। उन्होंने अग्नि और जल का उदाहरण देते हुए समझाया कि अग्नि में घी डालने से वह और प्रज्वलित होती है, जबकि पानी डालने से शांत हो जाती है,इसी प्रकार मनुष्य को जीवन में पानी अर्थात शांति और विनम्रता का स्वभाव अपनाना चाहिए।

रविवार को मातृ दिवस के अवसर पर आचार्य श्री भारद्वाज ने मां की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि “मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाली प्रथम गुरु होती है। मां के आशीर्वाद से ही संतान के जीवन में सफलता, संस्कार और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्री राम ने भी अपने जीवन में माता के वचनों को सर्वोपरि मानते हुए आदर्श पुत्र का उदाहरण प्रस्तुत किया। मां का स्थान संसार में सर्वोच्च है—मां के चरणों में ही स्वर्ग बसता है और मां की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य नहीं।


उन्होंने आगे कहा कि जिस घर में मां का सम्मान होता है, वहां सदैव सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। मां त्याग, ममता, करुणा और प्रेम की साक्षात मूर्ति होती है, जो बिना किसी अपेक्षा के अपने बच्चों के लिए समर्पित रहती है। मां की महिमा का वर्णन शब्दों में संभव नहीं है।
भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए आयोजन समिति द्वारा वातानुकूलित विशाल पंडाल की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालु सहजता से कथा का श्रवण कर पा रहे हैं। कथा समापन के पश्चात आरती की गई और प्रसाद का वितरण किया गया।
संपूर्ण आयोजन श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।

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