राजगढ़। अक्षय तृतीया के अवसर पर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का हजम उमड़ पड़ा। भगवान श्री आदिनाथ के महाअभिषेक के बाद पूजा का क्रम आरंभ हुआ जो सायंकाल 4 बजे तक चला। सुबह से शाम तक अनेक धार्मिक आयोजन भी हुए। वही, श्री राज राजेंद्र जयंतसेन म्यूजियम तीर्थ पर पांच दिवसीय पारणा महोत्सव का समापन 550 वर्षीतप आराधकों के पारणे के साथ हुआ। संपूर्ण आयोजन गच्छाधिपति आचार्य श्री नित्यसेन सूरिश्वरजी महाराज की निश्रा में हुए। पारणा महोत्सव में देश भर से आए हजारों गुरु भक्त साक्षी बने। म्यूजियम तीर्थं पर श्रेयांश कुमार का का वरघोड़ा निकाला गया।जो म्यूजियम तीर्थ से आरंभ होकर राज जयंत हस्तिनापुर नगरी में समापन हुआ।
इस चल समारोह में देशभर से आए श्रद्धालु शामिल हुए। वर्षीतप आराधकों का पारणा ईक्षुरस से करवाया गया। जिसका लाभ वोरा मथुरीबेन चिमनलाल त्रिभोवनदास परिवार ने लिया। आचार्य श्री नित्यसेन सूरीश्वर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने अक्षय तृतीया के दिन वर्षीतप आराधकों के पारणे का महत्व बताया। आयोजन के प्रमुख दिवस सोमवार को दोपहर12.39 बजे श्री आदिनाथ पंचकल्याणक पूजा का आयोजन हुआ तथा रात्रि में परमात्मा की भक्ति एवं आरती की गई।
पारणा महोत्सव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सहबौद्धिक प्रमुख दीपक विस्पुते, संघ के धर्मजागरण समन्वय के मालवा प्रांत सहसंयोजक ललित कोठारी व संघ के धार विभाग प्रचारक दिनेश तेजरा शामिल हुए। उन्होंने आचार्य श्री नित्यसेन सूरिश्वरजी व आचार्य श्री हितेषचंद्र विजयजी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
वर्षीतप की महिमा पर प्रकाश डाला –
श्री मोहनखेड़ा तीर्थ की भूमि पर अक्षय तृतीया के दिवस पर वर्षीतप आराधकों के पारणे का आयोजन हुआ। जिसमें गच्छाधिपति हितेशचंद्र सूरीश्वर जी महाराज व गच्छाधिपति आचार्य श्री लेखेंद्र सूरीश्वरजी महाराज की निश्रा में 60 तपस्वी के पारणे हुऐ। इस अवसर पर चल समारोह निकला गया। तपस्वियों को बग्गी में बैठाया गया। धर्मसभा का आयोजन हुआ। आचार्यद्वय ने वर्षीतप की तपस्या पर प्रकाश डाला। मुनिराज श्री पीयूषचंद्र विजयजी महाराज व मुनिराज श्री मृगेंद्र विजयजी महाराज की वर्षीतप तपस्या का पारणा हुआ। इस अवसर पर साधु एवं साध्वी भगवंत के साथ गुरु भक्त भी मौजूद रहे।


















