राजगढ़ – आचार्यद्वय का हुआ भव्य मंगल प्रवेश, धर्मसभा में दिए जीवन मूल्यों के संदेश, बड़ी संख्या में शामिल हुए समाजजन

राजगढ़। मंगलवार को गच्छाधिपति आचार्य श्री लेखेंद्रसूरीश्वरजी महाराज एवं गच्छाधिपति आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरिश्वरजी महाराज का मुनि मंडल एवं साध्वी मंडल के साथ भव्य नगर मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर नगर में चल समारोह निकाला गया। यह चल समारोह मेला मैदान स्थित शिव वाटिका से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ राजेंद्र भवन पहुंचा, जहां धर्मसभा में परिवर्तित हुआ।
चल समारोह में महिला मंडल की महिलाएं एक जैसी वेशभूषा में सिर पर कलश लिए चल रही थी। इसके पहले समाजजनों ने आचार्यद्वयश्री की अगवानी की। चल समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन भी शामिल हुए। मंगल प्रवेश के दौरान मार्ग में जगह-जगह समाजजनों द्वारा गहुली की गई।

राजेंद्र भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरिश्वरजी महाराज ने कहा कि साधना से प्राप्त ऊर्जा को संभालकर रखना चाहिए और जीवन में सदैव सकारात्मक विचारों को स्थान देना चाहिए। किसी की आलोचना किए बिना अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना ही सच्चा धर्म है।

उन्होंने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन कर्तव्य और बड़ों के सम्मान को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। परिवार में प्रेम, स्नेह और अपनत्व बनाए रखना ही सबसे बड़ी साधना है। कोरोना काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन अनिश्चित है, इसलिए हर पल को सकारात्मक भावों के साथ जीना चाहिए।आचार्य श्री ने कहा कि व्यक्ति को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए, तभी वह मंजिल तक पहुंच सकता है। प्रेम, स्नेह और आत्मीयता को जीवन में बनाए रखना आवश्यक है और इन्हें कभी कम नहीं होने देना चाहिए।

आचार्य श्री लेखेंद्रसूरीश्वरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धन-संपत्ति यदि चली जाए तो उसे पुनः प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन जीवन का समय वापस नहीं आता। इसलिए प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने विनम्रता पर बल देते हुए कहा कि जो व्यक्ति जीवन में नम्र रहता है, वही सच्ची सफलता प्राप्त करता है।
उन्होंने अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ और समाज में अनुशासन का होना अत्यंत आवश्यक है। केवल प्रवचन सुनने से नहीं, बल्कि उन्हें आचरण में उतारने से ही वास्तविक परिवर्तन आता है। जीवन में मिले अवसर को पहचानना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जीवन दुर्लभ है और इसका सदुपयोग ही इसे सार्थक बनाता है। इस दौरान उन्होंने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा कि सहयोग और साथ से ही सफलता मिलती है। श्री संघ की ओर से दोनों आचार्यों को कमली ओढ़ाई गई।

इस दौरान त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ अध्यक्ष संदीप खजांची, समाजसेवी अशोक भंडारी, मोहनखेड़ा तीर्थ ट्रस्टी सेठ सूजनमल जैन, मेघराज जैन, मांगीलाल रामाणी, कैलाशचंद्र पिपलिया, कांतिलाल जैन, प्रदीप रायली, राजेंद्र खजांची, छोटेलाल मामा, सेवांतिलाल मोदी, सुनील छजलानी, सुनील चत्तर,राकेश राजावत,धर्मेंद्र भंडारी, सोनू भंडारी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर अशोक भंडारी ने स्वागत भाषण एवं मोहनखेड़ा तीर्थ के ट्रस्टी सेठ सुजनमल जैन ने अपने विचार रखें। नवकारसी के लाभार्थी शैलेन्द्र कुमार शैतानमल सराफ परिवार का बहुमान किया गया। धर्मसभा के पश्चात प्रभावना का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन आर.के. जैन एवं दीपक जैन ने किया।

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