राजगढ़ – स्वर्गीय राजा दत्तीगांव की स्मृति में अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन, खूब लगे ठकाहे, जमकर गूंजी तालियां, अल सुबह तक डटे रहे श्रोता

राजगढ़। स्वर्गीय राजा श्री प्रेमसिंह दत्तीगांव (पूर्व विधायक, बदनावर) की 24वीं पुण्यतिथि के अवसर पर राजगढ़ में न्यू बस स्टैंड पर अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। शुक्रवार को आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम अल सुबह करीब 3 बजे तक पूरी ऊर्जा के साथ चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के रसिक श्रोताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा स्वर्गीय राजा प्रेमसिंह दत्तीगांव के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर राजमाता कुसुम सिंह दत्तीगांव, पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और पूर्व मंडी अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह दत्तीगांव विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मंच से अपनी बात रखते हुए पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने बेहद ओजस्वी स्वर में कहा कि “मैंने अमलतास के पेड़ नहीं, लोहे के पेड़ उगाए हैं। जब-जब मैंने उनको देखा लोहा देखा, लोहा देखा। लोहे की तरह तपते देखा, लोहे की तरह गलते देखा, लोहे की तरह ढलते देखा। जब-जब मैंने उनको देखा लोहा देखा, लोहा देखा। वक्त पड़ा तो मैंने उन्हें गोली की तरह चलते देखा।” उन्होंने आगे भावुक होते हुए कहा कि वे जीवन पर्यंत सेवा भाव के इस मार्ग पर निरंतर प्रयास करते रहेंगे और जनता की सेवा में जो भी बन पड़ेगा, उसे पूरी निष्ठा से समर्पित करेंगे।

इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। इंदौर से आए प्रसिद्ध कवि मुकेश मोलवा ने ‘मैं संघ शताब्दी बोल रहा हूँ’ कविता का पाठ किया और धार भोजशाला के वर्तमान संदर्भों को जोड़ते हुए जब “पूजा की थाल ले शुक्रवार आया” की ओजस्वी पंक्तियां सुनाईं, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, नाथद्वारा से आए हास्य कवि कानू पंडित ने ग्रामीण परिवेश की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि अपने गांव के बरगद, नीम और अंबुआ की छांव जरूरी है, इसीलिए इस हिंदुस्तान में गांव जरूरी है। कटनी से पधारीं कवयित्री प्रियंका मिश्रा ने मोहब्बत पर अपनी सुरीली रचनाओं से श्रोताओं को सराबोर कर दिया, तो दूसरी ओर लाफ्टर चैंपियन फेम आगरा के प्रताप फौजदार और देवास के कुलदीप रंगीला ने तीखे हास्य-व्यंग्य के बाणों से सबको लोटपोट कर दिया।

काव्य पाठ के इसी सिलसिले में कवयित्री शशि श्रेया ने भाग्य से सताए गए और प्रेम में रुलाए गए लोगों पर केंद्रित भावुक काव्य पाठ कर खूब वाहवाही लूटी। सोशल मीडिया पर अपने अनूठे अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले कवि डॉ. आदित्य जैन ने अलग-अलग पैरोडियों के माध्यम से वर्तमान में चल रहे ‘मेलोनी और पीएम मोदी’ के सोशल मीडिया मीम्स पर मजेदार प्रस्तुतियां दीं, जिसे युवाओं ने बेहद पसंद किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन डूंगरपुर से आए कवि विपुल विद्रोही ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में किया। कार्यक्रम का संचालन निलेश शर्मा ने किया। आयोजन समिति के सदस्य अशोक भंडारी, संदीप खजांची, राजेश देवड़ा, रमेश रामजी, सोनू भंडारी, भोजराज कमेडिया, मांगीलाल यादव, प्रितेश सराफ, रमेश राजपूत, दीपांशु ठाकर, हितेश परमार, जितेन्द्र (नानु), आयुष सेठी, हेमंत रोकड़िया और अल्पेश लछेटा ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए सभी आमंत्रित अतिथियों एवं कवियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी नागरिकों और रचनाकारों के प्रति आजाद भंडारी ने आभार व्यक्त किया।

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