राजगढ़। नगर के पंचधाम एक मुकाम श्री माताजी मंदिर में इन दिनों संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ जारी है। अधिक मास के अवसर पर आयोजित कथा का वाचन ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज के मुखारविंद से प्रतिदिन सायंकाल 7 बजे से किया जा रहा है। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं।
मंगलवार को कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने बाल गोपाल के साथ फूलों की होली खेली, जिससे मंदिर परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा। वहीं श्रद्धालुओं के बीच माखन मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। पूरे परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों की गूंज सुनाई देती रही।
कथा वाचन के दौरान श्री भारद्वाज ने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब वासुदेव और माता देवकी अत्यंत चिंतित हो उठे थे। इस पर बाल गोपाल ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि आप दोनों व्यर्थ ही व्याकुल हो रहे हैं। कारागार की सलाखें कंस का अहंकार या पहरेदारों का पहरा मुझे मेरे उद्देश्य से नहीं बाँध सकते। मैं अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए ही इस धरा पर अवतरित हुआ हूं।

उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर भक्तों की रक्षा करते हैं। मनुष्य केवल भक्ति रूपी दृष्टि से ही परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। ईश्वर प्रत्येक जीव में समान रूप से विद्यमान हैं और सच्ची निष्ठा एवं विश्वास के बल पर उन्हें कहीं भी अनुभव किया जा सकता है। इस दौरान नरसिंह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का उल्लेख किया और कहा कि भगवान ने अपने भक्त की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण किया। इससे स्पष्ट होता है कि सच्ची भक्ति ही मनुष्य को भवसागर से पार लगा सकती है।माताजी मंदिर में चल रही इस भागवत कथा का विश्राम 22 मई को होगा। प्रतिदिन कथा के पश्चात संगीतमय आरती का आयोजन किया जा रहा है।


















