राजगढ़। धार जिले के राजगढ़ की माटी में जन्मे और पले-बढ़े युवा कवि गौरव सिंह चौहान, जिन्हें हिंदी साहित्य एवं कवि सम्मेलन के मंचों पर ‘गौरव साक्षी’ के नाम से जाना जाता है, अब अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगे। वे 25 सितंबर को कतर की राजधानी दोहा में आयोजित एक भव्य काव्य संध्या में काव्य पाठ करेंगे। इस उपलब्धि से पूरे नगर और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
संघर्षों के बीच नहीं थमी कविता की साधना –
गौरव का जन्म राजगढ़ में ही हुआ और उनकी स्कूली शिक्षा भी यहीं संपन्न हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे इंदौर पहुंचे। इसी दौरान पिता स्व. नरेन्द्र सिंह चौहान के असमय निधन से परिवार पर गहरा संकट आ गया। युवावस्था में ही सिर से पिता का साया उठने के बाद गौरव ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी संभाला। विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनी काव्य साधना को कभी थमने नहीं दिया।
डॉ. कुमार विश्वास के सानिध्य में तराशा हुनर –
विगत लगभग पांच वर्षों से गौरव विख्यात रामकथा मर्मज्ञ एवं लोकप्रिय कवि डॉ. कुमार विश्वास के मार्गदर्शन में अपनी काव्य यात्रा को नई दिशा दे रहे हैं। वे डॉ. विश्वास द्वारा नवांकुर कवियों के प्रशिक्षण के लिए संचालित प्रकल्प ‘केवी शाला’ के प्रशिक्षित कवि हैं।
गौरव अब तक देश के कई प्रतिष्ठित मंचों पर शैलेश लोढ़ा, पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर, पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा और ओज के वरिष्ठ कवि डॉ. हरिओम पंवार जैसे शीर्ष हस्ताक्षर और शायरों के साथ काव्य पाठ कर चुके हैं। अनेक सम्मानों से अलंकृत गौरव की दोहा (कतर) यात्रा की खबर मिलने पर स्थानीय साहित्य प्रेमियों और नगरवासियों ने उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।



















