राजगढ़। नगर के सनातन धर्म के 13 मंदिरों में इन दिनों श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह महोत्सव की धूम है। विभिन्न मंदिरों में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, कथा एवं प्रवचन के आयोजन हो रहे हैं। महोत्सव के तीसरे दिन मंगलवार को मंदिरों में भक्त प्रहलाद की भक्ति और राजा अजामिल के जीवन प्रसंग की कथा सुनाई गई। कथावाचकों ने भगवान के नाम स्मरण, दृढ़ आस्था और सद्कर्म के महत्व को समझाया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचे।
तीन बत्ती स्थित श्रीराम मंदिर में पंडित सुनील शास्त्री (भानगढ़) ने भागवत कथा का वाचन करते हुए भक्त प्रहलाद और राजा अजामिल के प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान करती है। भगवान की भक्ति के साथ व्यक्ति को अपने आचरण में भी सत्य, संयम, करुणा और सदाचार को अपनाना चाहिए। भागवत महापुराण केवल कथा सुनने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने का संदेश देता है।

श्री राधाकृष्ण गवली समाज मंदिर में कथा पुराणी अभिमन्यु शर्मा ने भक्त प्रहलाद की कथा सुनाते हुए कहा कि सच्ची भक्ति परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। प्रहलाद ने विपरीत परिस्थितियों और अनेक कष्टों के बावजूद भगवान विष्णु की भक्ति नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भी जीवन में कितनी ही कठिनाइयां आएं, लेकिन ईश्वर पर विश्वास और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।

नाम स्मरण से जीवन को मिलती है सही दिशा –
श्री चारभुजा मंदिर में ज्योतिषाचार्य सुभाष शर्मा (दत्तीगांव) ने राजा अजामिल की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य का जीवन कितना भी भटक जाए, भगवान के नाम का स्मरण उसके जीवन को नई दिशा दे सकता है। कथा के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को अच्छे कर्म करने, बुराइयों से दूर रहने और नियमित रूप से भगवान का नाम लेने का संदेश दिया।

बुधवार को निकलेगा जुलूस –
कथा महोत्सव के चौथे दिन बुधवार को सभी मंदिरों में कथापुराणियों द्वारा श्रीकृष्ण जन्मवाचन किया जाएगा। इस अवसर पर दोपहर तीन बजे सभी मंदिरों में आरती होगी। माखन, मिश्री और लड्डू की प्रसादी बांटी जाएगी। श्रीचारभुजा युवा मंच मीडिया प्रभारी प्रभुसिंह राजपूत ने बताया कि मंदिरों के आरती के बाद चार बजे सभी मंदिरों का सामूहिक जन्म जुलूस निकाला जाएगा। जुलूस श्रीचारभुजा मंदिर से प्रारंभ होगा। जुलूस में लड्डू गोपाल की पालकी उठाए चलेगे। जबकि कुछ मंदिरों के श्रद्धालु सिर पर प्रतिमाजी को उठाएंगे चलेगे। इसको लेकर मंच द्वारा तैयारियों का अंतिम रूप दिया जा रहा हैं।


















