राजगढ़। सहकारिता समिति में ऋण राशि जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाने, नरवाई जलाने के मामलों में दर्ज प्रकरण वापस लेने तथा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शीघ्र शुरू करने की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले किसानों ने शनिवार को राजगढ़ कृषि उपज मंडी में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जिससे दिनभर मंडी की गतिविधियां प्रभावित रहीं।
धरने की सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार कनीराम वास्केल मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो सोमवार से आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
डिफॉल्ट से बचने के लिए घाटे में बेची फसल –
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राकेश सोलंकी ने बताया कि किसानों ने ऋण जमा करने की तिथि बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। वहीं समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों को मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी।
उन्होंने बताया कि किसानों को प्रति क्विंटल 400 से 500 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। कई किसान समय पर ऋण नहीं चुका सके, जिससे वे डिफॉल्ट हो गए और अब उन्हें पूरे वर्ष का ब्याज भी चुकाना पड़ेगा।
मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा धरना –
जिलाध्यक्ष सोलंकी ने सरकार से मांग की कि डिफॉल्ट हुए किसानों का ब्याज सरकार द्वारा भरा जाए तथा जिन किसानों ने नुकसान उठाकर ऋण चुकाया है, उन्हें आर्थिक राहत दी जाए। इस दौरान हरि भायल, रमेश मेड़ा सहित बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल पर मौजूद रहे।
मंडी में खरीदी ठप –
सुबह से ही किसान मंडी गेट पर धरने पर बैठ गए, जिससे किसान अपनी उपज लेकर मंडी नहीं पहुंच पाए और शनिवार को खरीदी पूरी तरह ठप रही। हालांकि मंडी परिसर में पहले से मौजूद कुछ वाहनों की उपज की नीलामी जरूर की गई। गेट बंद होने से कई ट्रैक्टर भी परिसर में ही फंसे रहे।


















