सरदारपुर। अखिल भारतीय सिर्वी महासभा की जिला एवं तहसील युवा इकाई के पदाधिकारियों ने सोमवार को एसडीएम सलोनी अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर भोजशाला में 23 जनवरी बसंत पंचमी के दिन अखंड, निर्बाध एवं एकमात्र हिंदू पूजा सुनिश्चित किए जाने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि भोजशाला हिन्दू समाज की माँ सरस्वती (वाग्देवी) का प्राचीन मंदिर है, जहां पूजा ही होती है और किसी भी प्रकार की अन्य गतिविधि का कोई औचित्य नहीं है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भोजशाला राजा भोज के काल से विद्या, शास्त्रार्थ और माँ वाग्देवी की आराधना का केंद्र रही है। इसके शिलालेख, स्थापत्य और लोक-आस्था इस ऐतिहासिक सत्य को प्रमाणित करते हैं। बसंत पंचमी माँ सरस्वती की उपासना का महापर्व है, इसलिए 23 जनवरी 2026 को भोजशाला में केवल और केवल अखंड पूजा होनी चाहिए। उस दिन किसी भी प्रकार की वैकल्पिक, समानांतर अथवा विरोधाभासी गतिविधि को पूर्णतः प्रतिबंधित किया जाए। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि पूजा किसी की कृपा नहीं बल्कि हिन्दू समाज का संवैधानिक और धार्मिक अधिकार है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से आग्रह किया गया कि हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था, अस्मिता और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण, निर्भय और व्यवस्थित पूजा सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी प्रकार की अस्थिरता या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो। महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि हिन्दू समाज शांत और संयमित है, लेकिन अपनी आस्था और अधिकारों के प्रति सजग भी है। उन्हें विश्वास है कि प्रशासन सत्य, इतिहास और जनभावना के अनुरूप निर्णय लेकर भोजशाला में माँ सरस्वती की पूजा को बिना किसी बाधा के संपन्न कराएगा।

















