सरदारपुर। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही को लेकर खबरे तो कई बार सुर्खियों में रहती है। लेकिन सरकारी अस्पतालो में ऐसे कई सेवाभावी चिकित्सक भी हैं, जो मरीजो की गंभीर एवं जटिल बीमारियों का उपचार सरकारी अस्पताल में निशुल्क कर देते हैं। ऐसे उपचारों के लिए निजी अस्पतालों में हजारो रुपये खर्च करने पड़ते है।
आज हम बात कर कर रहे हैं सिविल अस्पताल सरदारपुर के एक डॉक्टर की। सिविल अस्पताल सरदारपुर बीते दिनों लापरवाही को लेकर सुर्खियों में रहा है लेकिन यहां पर पदस्थ कई चिकित्सकों ने ऐसी जटिल गंभीर बीमार मरीजों का उपचार किया है, जिस पर निजी अस्पतालो में हजारों रुपये खर्च करना पड़ता हैं।
करीब दो दशक से भी अधिक समय से सिविल अस्पताल में पदस्थ सर्जन डाॅ. नितीन जोशी ने झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के एक आदिवासी बालक का केलोइड का उपचार निःशुल्क किया है। जबकि यह उपचार निजी अस्पताल में कराने पर 15 से 20 हजार रुपये का खर्च होता है।
झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के 14 वर्ष के बालक किशन पिता रूमाल भाभर को उसके परिजन उपचार के लिए सिविल अस्पताल सरदारपुर लेकर पहुंचे। बालक को दोनो कान पर केलाइड (कान के पीछे भाग पर गांठ) था। जिसका उपचार बालक के परिजन दो-तीन बार निजी अस्पताल में करवा चुके थे। लेकिन फिर से केलाइड उभर जाता था।
जिस पर सर्जन डाॅ. नितीन जोशी ने बालक की पूरी काउंसलिंग कर एक कान की सिविल अस्पताल में अलग-अलग प्रकार की दवाईयों और इंजेक्शन से छोटी सी सर्जरी कर केलाइड को काॅन से अलग कर वहा पर टाके लगा दिए तथा दो माह बाद परिजनों को बालक को लेकर आने को कहा। परिजन बालक को तीन माह बाद लेकर अस्पताल आए। डाॅ नितीन जोशी ने बताया की तीन माह बाद बालक के कान के पिछे केलाइड नही था तभी हमने उसके दुसरे कान से भी उसी प्रकार केलाइड को अलग किया। डाॅ. जोशी ने बताया की बालक का पुरा उपचार सिविल अस्पताल मे निशुल्क हुआ यदि। यह उपचार निजी अस्पतला में होता तो 20 से 30 हजार रुपये का खर्च होता।
डाॅ नितीन जोशी ने बताया की ऐसे कई जटिल केस आते है, सीमित संसाधनों के बाद भी हमारा पुरा प्रयास रहता है की मरीज को बेहतर उपचार यही पर हो जाए। अभी सिविल अस्पताल में माइनर ओटी ही है। लेकिन नए भवन में मेजर ओटी मे सारी सुविधाएं होगी जिसके बाद अपेंडिक्स सहित कई सर्जरी मरीज की यही पर हो जाएगी।


















