सरदारपुर। समीपस्थ ग्राम मोरगांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन कथा पंडाल पूरी तरह भक्ति रस में सराबोर नजर आया। चतुर्थ दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। जैसे ही वासुदेव जी द्वारा बाल गोपाल को गोकुल लाने का प्रसंग आया, समूचा पंडाल ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया।
कथा व्यास पंडित रविराज महाराज ने प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब धरा पर अधर्म, पाप और अत्याचार बढ़ते हैं, तब-तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए परमात्मा का अवतार होता है। उन्होंने कंस के अत्याचारों, माता देवकी व वासुदेव जी के कारागार प्रसंग और प्रभु के गोकुल गमन की दिव्य लीलाओं का विस्तार से उल्लेख किया। कथा व्यास ने कहा कि ईश्वर को धन, पद या बाह्य प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि केवल निर्मल मन, सच्चे प्रेम और अनन्य भक्ति से ही पाया जा सकता है।
कृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मनमोहक जीवंत झांकी सजाई गई। टोकरी में विराजमान नन्हे कान्हा के स्वरूप पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा की। इस दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालु भक्ति भजनों की धुन पर जमकर झूमे। जन्मोत्सव के उपरांत सभी भक्तों को माखन-मिश्री का विशेष प्रसाद वितरित किया गया। ग्रामीण धीरज पाटीदार ने बताया कि गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने प्रतिदिन आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।


















