राजगढ़। नगर में सनातन धर्म के 13 मंदिरों में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा सप्ताह महोत्सव के चौथे दिन बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। दोपहर 3 बजे कथा पुराणियों ने श्रीकृष्ण जन्म का वाचन किया। जन्म प्रसंग आते ही ’’‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की’’’ के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे। महाआरती के बाद माखन-मिश्री की प्रसादी वितरित की गई और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को पालने में झुलाया गया।

शाम 4 बजे श्री चारभुजा मंदिर से जन्म जुलूस निकाला गया। जुलूस मैन चौपाटी, चबूतरा चौक और लाल दरवाजा होते हुए पुनः चारभुजा मंदिर पहुंचा। बैंड पर बज रहे भक्ति गीतों और ढोल की ताल पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया।

सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़े –
श्री राधाकृष्ण राजपूत समाज मंदिर पर आचार्य कृष्णकांत उपाध्याय ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्म धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए।

देववंशीय लौहार समाज के श्री राम मंदिर में पंडित प्रकाश शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से कर्म और कर्तव्य का संदेश दिया। मनुष्य को फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।
श्री माताजी मंदिर में पंडित हेमंत भारद्वाज ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं प्रेम, भक्ति और समर्पण का संदेश देती हैं। सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता।


















