राजगढ़ – ट्रेचिंग ग्राउंड के पास ईंट भट्टे हटाने का आदेश, सात दिन की मोहलत से भड़का प्रजापत समाज, आजीविका पर संकट की आशंका, विधायक ग्रेवाल से लगाई गुहार

राजगढ़। नगर की संजय कॉलोनी स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड से सटे क्षेत्र मेबसंचालित ईंट भट्टों को सात दिन के भीतर हटाने के नगर परिषद के आदेश से विवाद की स्थिति बन गई है। 27 फरवरी को नगर परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर भट्ठा संचालकों को मिट्टी एवं तैयार ईंटों का स्टॉक हटाने का नोटिस थमाया। नोटिस जारी होते ही प्रजापत (कुम्हार) समाज और मजदूरों में आक्रोश फैल गया।

दरअसल नगर परिषद ट्रेचिंग ग्राउंड क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रही है, जिससे नगर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा सके। इसी प्रक्रिया के तहत आसपास संचालित ईंट भट्टों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

समाजजनों के अनुसार संजय कॉलोनी क्षेत्र में करीब दो दर्जन ईंट भट्टे संचालित हैं। प्रत्येक भट्ठे पर दो से तीन लाख तक कच्ची एवं पक्की ईंटों का स्टॉक मौजूद है, जिसकी बाजार कीमत लाखों रुपए में आंकी जा रही है। इसी समस्या को लेकर रविवार को प्रजापत समाज के लोगों ने विधायक प्रताप ग्रेवाल से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। समाजजनों द्वारा मांग की गई कि वर्तमान सीजन पूर्ण होने तक भट्टों को संचालन की अनुमति दी जाए अथवा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं भी शामिल हुई।

विधायक ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर स्थल का निरीक्षण करने तथा सभी पक्षों को सुनकर उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। ईंट भट्ठा संचालक रमेश देवचंद, शांतिलाल धन्नालाल, रामचंद्र गंगाराम एवं सोहनलाल नाथाजी ने बताया कि बारिश के बाद प्रतिवर्ष ईंट निर्माण का कार्य प्रारंभ होता है और वर्तमान सीजन को लगभग तीन माह बीत चुके हैं। अधिकांश भट्टों पर ईंटें तैयार अवस्था में हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पकाई की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में मात्र सात दिन की मोहलत देना अव्यावहारिक है और इससे लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान होगा।
संचालकों का कहना है कि इन भट्टों से सीधे तौर पर करीब एक हजार से पंद्रह सौ मजदूरों एवं उनके परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। अचानक की गई कार्रवाई से इन परिवारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।

इधर, नगर परिषद सीएमओ ज्योति सुनारिया ने कहा कि जनवरी माह में भट्ठा संचालकों को सामग्री हटाने के लिए नोटिस दिया गया था परंतु एक माह बीत जाने के बाद भी संचालकों ने सामग्री को नहीं हटाया। 27 फरवरी को मौका निरीक्षण किया गया था उसके पश्चात इन्हें सूचना पत्र जारी किया गया।

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