कथा वाचक श्री भारद्वाज ने कहा- मन की शांति का मार्ग सत्संग से होकर ही गुजरता हैं
राजगढ़। नगर के मार्केटिंग सोसायटी ग्राउंड पर आयोजित भव्य श्रीराम कथा इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। कथा के छठे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु ने कथा का श्रवण करते हुए धर्मलाभ अर्जित किया। कथा के दौरान पूरा परिसर भजन-कीर्तन, जयकारों और प्रभु श्रीराम के नाम से गुंजायमान हो उठा, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
कथा का वाचन ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तमजी भारद्वाज के मुखारविंद से किया जा रहा है। शनिवार को छठे दिन की कथा में उन्होंने श्रीराम के आदर्श चरित्र, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आत्मा की शुद्धि और मन की शांति का वास्तविक मार्ग कथा और सत्संग से होकर ही गुजरता है। उन्होंने श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम ने हर परिस्थिति में धैर्य, त्याग और मर्यादा का पालन कर मानव जीवन के लिए सर्वोत्तम आदर्श स्थापित किया।

श्री भारद्वाज ने कहा कि संतों के श्रीमुख से निकली कथा मन, मस्तिष्क और आत्मा का समग्र उपचार करती है। दवाइयां केवल शरीर की व्याधियों को दूर कर सकती हैं, लेकिन आत्मिक शांति प्रभु राम के स्मरण, नाम ,जप और सत्संग से ही प्राप्त होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीराम नाम के जप का महत्व बताते हुए कहा कि “राम नाम” का स्मरण व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जीवन में स्थिरता लाता है। कथा स्थल पर सामूहिक रूप से श्रीराम नाम का जाप भी किया जा रहा है, जिससे वातावरण और अधिक आध्यात्मिक और ऊर्जावान हो गया है। कथा का समापन 12 मई को होगा।
यह आयोजन श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के द्वारा किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशाल वातानुकूलित पंडाल की व्यवस्था की गई है, जहां प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के समापन पर प्रतिदिन आरती के साथ महाप्रसादी का वितरण भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने बताया कि 13 मई को सर्व समाज का निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें 108 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य रखा गया है। इस आयोजन की तैयारियां भी जोरों पर हैं।


















