राजगढ़। नगर के मार्केटिंग सोसायटी ग्राउंड में 4 मई से चल रही श्रीराम कथा एवं राम नाम यज्ञ का विश्राम मंगलवार को भक्ति और भावनाओं के बीच हुआ। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का रसपान करते रहे और राम नाम की भक्ति में सराबोर नजर आए।
भीषण गर्मी को देखते हुए श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास समाज ट्रस्ट द्वारा वातानुकूलित पंडाल की विशेष व्यवस्था की गई थी। इसी पंडाल में बैठकर श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम के नाम का जाप करते हुए कथा श्रवण का आनंद लिया। कथा का वाचन ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम भारद्वाज के मुखारविंद से हुआ, जिन्होंने अपने धर्म उपदेश से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कथा विश्राम के अंतिम दिवस मंगलवार को श्री भारद्वाज ने भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि प्रभु के आगमन पर अयोध्या दीपों की रोशनी से जगमगा उठी थी और हर घर में उत्सव का माहौल था।मानो रात्रि में सूर्य का प्रकाश चारों दिशाओं में फैल गया हो। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इसके साथ ही उन्होंने भगवान श्रीराम के भव्य राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार प्रभु ने आदर्श शासन रामराज्य की स्थापना की, जहां न्याय, धर्म और लोककल्याण सर्वोपरि था। उन्होंने यह भी बताया कि अयोध्या लौटने के बाद प्रभु श्रीराम ने प्रजा को मर्यादा, कर्तव्य और धर्म का संदेश दिया।

शिव-उमा संवाद और राम नाम की महिमा –
कथा के दौरान पं. भारद्वाज ने शिव-उमा संवाद का वर्णन करते हुए भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को श्रीराम नाम की महिमा समझाने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और प्रभावी साधना है। राम नाम की महिमा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को राम नाम जप के महत्व से अवगत कराया गया।
इसी के साथ आयोजन समिति द्वारा प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। साथ ही परिसर में राम नाम यज्ञ का आयोजन भी निरंतर चलता रहा, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कथा के विश्राम के बाद आरती कर महाप्रसादी का वितरण किया गया।
सामूहिक विवाह की तैयारियां पूरी –
आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने बताया कि 4 मई से 12 मई तक आयोजित इस भव्य श्रीराम कथा के पश्चात 13 मई को इसी स्थल पर सर्व समाज का नि:शुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में करीब 25 से अधिक जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे। साथ ही नगर चौरासी सहभोज का आयोजन भी रखा गया है, जिसमें सर्व समाज की भागीदारी रहेगी। आयोजन को लेकर सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं और समिति के सदस्यों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई।


















