राजगढ़। मालव केसरी, प्रसिद्ध प्रवचनकार एवं वाणी के जादूगर परम पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमल जी महाराज साहब की 42वीं पुण्यतिथि गुरुवार को महावीर स्थानक भवन राजगढ़ में श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक वातावरण के बीच मनाई गई। दिनभर आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 6 बजे प्रार्थना से हुआ। इसके बाद प्रातः 8 से 9 बजे तक श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप एवं श्री सौभाग्य चालीसा का पाठ किया। इस पुण्य प्रभावना का लाभ वीरेंद्र कुमार केशरचन्द वागरेचा परिवार तथा श्री बाबूलाल मूणत परिवार ने लिया। प्रातः 9 से 10 बजे तक आयोजित धर्मसभा में श्री धर्मदास जैन स्वाध्याय संघ, थांदला द्वारा संचालित स्वाध्याय के अंतर्गत संतोष बुरड़ ने पूज्य गुरुदेव श्री सौभाग्यमल जी म.सा. के तप, त्याग, संयम, धर्म प्रभावना एवं समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने गुरुदेव के जीवन को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
गुणानुवाद सभा में अरुण वागरेचा, पंकज मामा ने गुरुदेव के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। श्रद्धालुओं ने भी भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित कर गुरुदेव का स्मरण किया।
पुण्यतिथि के अवसर पर जप, तप, त्याग, गुणानुवाद सभा एवं दयाव्रत सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। दयाव्रत के अंतर्गत जीवदया एवं समाजसेवा से जुड़े धार्मिक कार्य संपन्न हुए। श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था का लाभ भी वीरेंद्र कुमार केशरचन्द वागरेचा परिवार ने लिया। पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल म.सा. के आदर्श, तप, त्याग, संयम एवं धर्म प्रभावना का संदेश आज असंख्य श्रद्धालुओं को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मीडिया प्रभारी हितेश वागरेचा ने बताया कि कार्यक्रम प्रातः से सायंकाल तक श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ, जिसमें समाजजनों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।


















