राजगढ़। श्री चारभुजा मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन दिन शनिवार को कथावाचक ज्योतिषाचार्य पं. सुभाष शर्मा दत्तीगांव ने भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग स्वरूप की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को श्री रामेश्वरम एवं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा सुनाते हुए इनके धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कथावाचक शर्मा ने कहा कि रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और भगवान श्रीराम की भक्ति एवं आस्था का प्रतीक है। यहां श्रद्धा से भगवान शिव का स्मरण और पूजन करने से मन को शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा सुनाते हुए कहा कि घृष्णेश्वर की कथा में भगवान शिव की अनन्य भक्ति, धैर्य और श्रद्धा का संदेश मिलता है।
कथा के दौरान भक्ति गीतों पर महिलाओं ने नृत्य की प्रस्तुति दी। कथा के अंतिम दिन क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल, नपं अध्यक्ष प्रतिनिधि महेश जायसवाल, पत्रकार प्रभुसिंह राजपूत, पार्षद राजेश गुंडिया, राजेंद्र लोहार एवं कानू शर्मा कथा स्थल पहुंचे। उन्होंने कथावाचक पं. सुभाष शर्मा दत्तीगांव का शाल-श्रीफल भेंटकर सम्मान किया। साथ ही 24 अगस्त को सद्भावना मंच द्वारा आयोजित कावड़ यात्रा में शामिल होने के लिए सभी श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। समापन अवसर पर महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन किया गया।



















