बामनिया-झाबुआ। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर वाहनों को निशाना बनाकर पत्थर फेंकने की एक और घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। चलती गाड़ियों पर पत्थरबाजी का यह सिलसिला अगर नहीं रुका तो किसी दिन बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बताया जा रहा है कि बीती रात एक्सप्रेसवे पर गुजर रहे वाहनों को पत्थरों से निशाना बनाया गया। घटना में वाहन के शीशे टूटने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि वाहन में महिला, बुजुर्ग या बच्चे सवार हों तो ऐसे हमले के परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते हैं।
लूट नहीं तो आखिर पत्थरबाजी क्यों?
घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वाहनों को निशाना बनाने के पीछे मकसद क्या है? क्या यह महज शरारत है या इसके पीछे कोई और वजह है? लगातार ऐसी घटनाएं सामने आना सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की गश्त पर्याप्त है? क्या एक्सप्रेसवे के आसपास चिन्हित स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है? और अगर पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं तो आरोपियों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पाई?
एक पत्थर जिंदगी पर पड़ सकता है भारी –
चलती कार के शीशे पर फेंका गया पत्थर सिर्फ कांच नहीं तोड़ता, बल्कि चालक का संतुलन बिगाड़कर गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसे में मामला केवल वाहन को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे लोगों की जान की सुरक्षा से जुड़ा है। अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस इस घटना को कितनी गंभीरता से लेती है और एक्सप्रेसवे पर पत्थरबाजी रोकने तथा जिम्मेदार लोगों की पहचान के लिए क्या कार्रवाई करती है।


















