रिंगनोद क्षेत्र में मेंटेनेंस का बड़ा खेल बेनकाब: पहली बारिश में ध्वस्त बिजली व्यवस्था, लोड सेटिंग की आड़ में रातभर अंधेरा, जर्जर तार-ट्रांसफार्मर बने मुसीबत, जनप्रतिनिधि अब भी मौन

रिंगनोद। क्षेत्र में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है और हालात विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। भीषण गर्मी के दौरान मेंटेनेंस के नाम पर 10 से 12 घंटे तक बिजली कटौती कर ग्रामीणों को बेहाल किया गया, लेकिन दरअसल, मानसून की पहली ही बारिश ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी। नतीजतन हल्की बारिश में ही बिजली व्यवस्था चरमरा गई कहीं तार टूट रहे हैं तो कहीं फाल्ट के चलते घंटों आपूर्ति बाधित हो रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि मेंटेनेंस केवल दिखावा साबित हुआ। गुमानपुरा सहित आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि विभाग ने जमीनी सुधार के बजाय सिर्फ पेड़ों की टहनियों की छंटाई कर खानापूर्ति की। विभाग की कारस्तानी यह है कि जर्जर तार और पुराने ट्रांसफार्मर जस के तस छोड़ दिए गए। लिहाजा, अब मामूली बारिश भी पूरे सिस्टम को ठप कर रही है और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

इधर, लोड सेटिंग के नाम पर रात के समय की जा रही अंधाधुंध कटौती ने स्थिति को और भयावह बना दिया है। शनिवार रात रिंगनोद, गुमानपुरा और भोपावर क्षेत्र के कई गांव अंधेरे में डूबे रहे। ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि वे समय पर पूरा बिल जमा करते हैं, बावजूद इसके बिना किसी सूचना के बिजली काट दी जाती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर लोड सेटिंग का खेल रात में ही क्यों चलता है, दिन में क्यों नहीं? विडंबना यह है कि इस गंभीर संकट के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए हैं।

दरअसल, जनता लगातार परेशान है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से न तो कोई ठोस पहल हो रही है और न ही जवाबदेही तय की जा रही है। बहरहाल इससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पनप रहा है।
ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और विभाग की मनमानी यूं ही जारी रही, तो आने वाले चुनावों में इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अब जनता आश्वासनों से नहीं, ठोस कार्रवाई से ही संतुष्ट होगी।

इस मामले में विद्युत विभाग रिंगनोद के AE गजेंद्र वास्केल ने कहा कि लोड सेटिंग वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश पर की जा रही हैं। लाइट फॉल्ट व अन्य समस्याओ को लेकर हमारे द्वारा लगातार जांच कर इसका समाधान किया जा रहा हैं।

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