रिंगनोद। आचार्य श्री नित्यसेन सुरिश्वर जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती साध्वी स्नेहलता श्री जी की सुशिष्या विज्ञानलता श्री जी, राजयशा श्री जी एवं संवरलता श्री जी महाराज साहब के सानिध्य में चातुर्मास के अंतर्गत कई धार्मिक, आध्यात्मिक और आत्मोत्थानकारी तपस्याएं सुख-साता पूर्वक संपन्न हो रही हैं। इसी क्रम में 18 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक आयोजित नवपद ओली जी की तप-आराधना का मंगलवार को उत्साहपूर्वक समापन हुआ।
इस नवपद ओली जी की आराधना का लाभ कमलाबाई प्रकाशचंद, पवन कुमार, हितेश कुमार, जैनम, सार्थक एवं समस्त मेहता परिवार द्वारा लिया गया। इस नौ दिवसीय आराधना में नगर के 35 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने कठिनतम तपस्या कर आत्म-कल्याण अर्जित किया।
शोभायात्रा और धर्मसभा का आयोजन –
नवपद ओली के अंतिम दिन मंगलवार को साध्वी श्रीजी के सानिध्य में सभी तपस्वियों के साथ भव्य चल समारोह (शोभायात्रा) निकाला गया। नगर भ्रमण के पश्चात चल समारोह श्री चंदाप्रभु जैन मंदिर पहुंचा, जहां दर्शन-वंदन के बाद सभी श्रावक-श्राविकाएं जैन धर्मशाला पहुंचे।
धर्मसभा का शुभारंभ साध्वी जी के मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन उद्घोषक चिराग भंसाली ने किया और पूरे आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। रश्मि सुनील मेहता एवं रंजन पवन मेहता ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर तपस्वियों की भावपूर्ण अनुमोदना की। इसके बाद दीपक कोठारी, पवन मेहता, संजय फुलफगर (थांदला), रूपाली कोठारी और सुनीता लुणावत ने भी सभा को संबोधित कर तपस्वियों के भावों की सराहना की।
लाभार्थी परिवार की ओर से कमलाबाई प्रकाशचंद मेहता ने आयोजन के दौरान अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए सभी तपस्वियों से खमतखामणा (क्षमा याचना) की और आयोजन को सफल बनाने के लिए श्री संघ का आभार व्यक्त किया।
नवपद आराधना से होती है कर्मों की निर्जरा: साध्वी श्रीजी
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्रीजी ने कहा कि नवपद ओली की आराधना मानव जीवन के कई जन्मों के संचित कर्मों की निर्जरा करने का उत्तम माध्यम है। उन्होंने राजा श्रीपाल और मयणा सुंदरी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार नवपद ओली की साधना से वे शारीरिक कष्टों और सांसारिक कर्मों से मुक्त होकर मोक्षगामी बने। साध्वी श्रीजी ने कहा कि तपस्वी सभी प्रकार के रसों (विगयों) का त्याग कर, रूखा-सूखा आहार ग्रहण कर प्रतिदिन देववंदन, पूजन, प्रतिक्रमण और जाप के माध्यम से आत्म-शुद्धि की ओर अग्रसर होते हैं।
तपस्वियों का हुआ बहुमान –
समारोह में मेहता परिवार द्वारा सभी तपस्वियों का तिलक, माला व प्रभावना देकर बहुमान किया गया। वहीं, जैन श्रीसंघ रिंगनोद की ओर से लाभार्थी मेहता परिवार का अभिनंदन व सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में कमलाबाई प्रकाशचंद, पवन कुमार, हितेश कुमार मेहता परिवार द्वारा सभी उपस्थित जन को प्रभावना भेंट की गई और सकल संघ के स्वामीवात्सल्य का आयोजन रखा गया। कार्यक्रम में रिंगनोद सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।


















