राजगढ़। इंदौर-अहमदाबाद फोरलेन के व्यस्ततम कुक्षी चौकड़ी क्षेत्र में करीब पांच माह से ठप पड़ा सर्विस रोड निर्माण कार्य आखिरकार फिर से शुरू हो गया है। लंबे समय तक काम बंद रहने से हताश हो चुके क्षेत्रवासियों और वाहन चालकों के लिए यह किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। भले ही फिलहाल निर्माण कार्य की गति धीमी दिखाई दे रही हो, लेकिन दोबारा शुरू हुई गतिविधियों ने लोगों की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है।
पिछले पांच महीनों से यहां सर्विस रोड और प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण पूरी तरह बंद पड़ा था। इस दौरान भारी यातायात दबाव के चलते दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहा। स्थानीय निवासी सूरज मारु और राजू पंवार का कहना है कि कार्य बंद रहने के दौरान कई छोटे-बड़े सड़क हादसे सामने आए, जिसने इस प्रोजेक्ट की तत्काल आवश्यकता को और अधिक गंभीर बना दिया।
वर्तमान में ठेकेदार द्वारा फोरलेन चौकड़ी से निजी अस्पताल की ओर जाने वाले हिस्से में गिट्टी और चूरी डालकर लेवलिंग का कार्य किया जा रहा है। इससे पहले पूर्व ठेकेदार द्वारा खुदाई, मुरम भराव और प्रारंभिक लेवलिंग का कार्य पूरा कर लिया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य अधर में लटक गया था।
हालांकि कार्य पुनः शुरू हो गया है, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। सर्विस रोड क्षेत्र में कई स्थानों पर बिजली के पोल निर्माण में बाधा बन रहे हैं, जिनकी शिफ्टिंग के बिना कार्य को अपेक्षित गति देना संभव नहीं होगा।
कुक्षी चौकड़ी पर लगातार बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए यहां ओवरब्रिज निर्माण को स्वीकृति दी गई है। लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह ओवरब्रिज करीब एक किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें दोनों ओर 500-500 मीटर तक विस्तार रहेगा। साथ ही सर्विस रोड के निर्माण से स्थानीय और हाईवे यातायात को अलग-अलग संचालित किया जाएगा, जिससे दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
एनएचएआई इंदौर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के अनुसार, फिलहाल प्रथम चरण में सर्विस रोड निर्माण कार्य शुरू किया गया है, जिसे शीघ्र पूर्ण करने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ओवरब्रिज निर्माण को डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
लंबे इंतजार के बाद दोबारा शुरू हुए इस प्रोजेक्ट ने क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि निर्माण कार्य कब तक रफ्तार पकड़ता है और लोगों को सुरक्षित व सुगम यातायात की सुविधा कब तक मिल पाती है।


















