सरदारपुर – चार माह बाद आया उच्च न्यायालय का आदेश, अब सोलंकी रहेंगे BRC, उच्च न्यायालय ने भंवर की याचिका खारिज की

सरदारपुर। 5 जनवरी को जिला शिक्षा केन्द्र धार द्वारा आदेश जारी करते हुए जनपद शिक्षा केन्द्र के बीआरसी बूटसिह भंवर की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने से इन्हे हटाकर महेन्द्रसिंह सोलंकी को बीआरसी पद पर नियुक्त किया गया था।बीआरसी पद से हटाए जाने व नवीन नियुक्ति के विरुद्ध भंवर ने उच्च न्यायालय इन्दौर मे याचिका दायर की थी। जिस पर उच्च न्यायालय ने 19 जनवरी को भंवर को स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद से ही बीआरसी के एक पद पर दो बीआरसी कार्य कर रहे थे।

मिली जानकारी के अनुसार बूटसिह भंवर पर विभागीय जांच के उपरान्त गणवेश वितरण मे अनियमितता व एक प्रधानाध्यापक के साथ अभद्र व्यवहार के साथ शाला निधि से अनुचित राशि की मांग का दोषी पाया गया था। इसके बाद भंवर की प्रतिनियुक्ति सेवा 02 वर्ष पूर्ण होने पर समाप्त करते हुए इनकी सेवाएं मूल जनजातीय कार्य विभाग को लोटा दी गई थी। वही भंवर के स्थान पर सोलंकी को बीआरसी पद पर नियुक्त किया गया था।

भंवर ने विभागीय जांच मे पूर्ण दोषी पाए जाने व बीआरसी पद से गलत तरीके से हटाए जाने व बीआरसी पद पर नवीन नियुक्ति आदेश को लेकर उच्च न्यायालय मे याचिका दायर कर बताया था कि उनको विभाग ने सुनवाई का अवसर नही दिया। वही बीआरसी पद पर 4 व 5 जनवरी को नई नियुक्ति आदेश को भी चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने 19 जनवरी को भंवर की याचिका पर स्थगन आदेश जारी करते हुए विभाग को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया था। इसके बाद विभाग ने उच्च न्यायालय मे सम्पूर्ण तर्क, तथ्य व दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए।

उच्च न्यायालय के जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच मे चार माह मे अनेक तारीखो पर इस मामले की सुनवाई हुई। दोनो पक्षो को विस्तार से सुना गया।इसके बाद 14 मई को इस पर 15 पेज का आदेश पारित करते हुए उच्च न्यायालय ने शासन के तर्क, तथ्य व दस्तावेजी साक्ष्यो को उपयुक्त व सही पाते हुए भंवर की याचिका खारिज कर दी। उच्च न्यायालय मे भंवर की याचिका खारिज होने के बाद 5 जनवरी 2026 को बीआरसी पद पर नियुक्त महेन्द्रसिंह सोलंकी अब बीआरसी पद पर रहकर अब पदीय कार्यो का निर्वहन करेगे।

उल्लेखनीय है कि गत 4 माह से एक पद पर दो बीआरसी क्रमशः भंवर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त वाले व दूसरे शासन द्वारा नियुक्त सोलंकी तैनात थे। जिससे जनपद शिक्षा केन्द्र अन्तर्गत शैक्षणिक कार्यो के संपादन को लेकर कशमकश की स्थिति बनी हुई थी।

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