सरदारपुर सिविल अस्पताल की खबर का असर : प्रभारी CBMO ने व्यवस्थाओं में किया सुधार, ताले में बंद पडे कूलर-एसी निकले बाहर, मरीजों को मिली राहत

अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर आज धार में मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिल सकता है प्रतिनिधि मंडल

सरदारपुर। सिविल अस्पताल सरदारपुर की अव्यवस्थाओं को लेकर बीते दिनों समाचार प्रकाशित किया था। समाचार के प्रकाशन के बाद कुछ हद तक सिविल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार देखने को मिला है। सिविल अस्पताल के प्रभारी बीएमओ डॉ. सचिन द्विवेदी ने अस्पताल की व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास किए हैं। जिसमे कई महीनों से बंद पडे सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त करवाकर उन्हे चालु करवाया। साथ ही सिविल अस्पताल के पुराने भवन में दानदाताओं के द्वारा दिए गए कुलर और पंखे जो ताले मे बंद पड़े थे। उन्हे भी निकलवाकर सही करवाकर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड में लगाया। जिससे भीषण गर्मी में उपचार करवाने वाले मरीजों और चिकित्सकों को राहत मिली है।

बीएमओ डॉ. सचिन द्विवेदी ने चर्चा में बताया कि कुलर और एसी को सही करवाकर वार्ड में लगाया गया है, जिससे अब मरीजो को गर्मी से राहत मिलने लगी है। बंद पडे ऑक्सीजन प्लांट को भी शुरू करवाने के प्रयास किए जा रहे है। वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की गई है जल्द ही ऑक्सीजन प्लांट भी आरंभ होगा। डॉ. द्विवेदी ने बताया की पुराने भवन मे मरीजो को पानी पीने के लिए जो आरओ लगा है उसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। वही डॉक्टरो के सामने एक बडी समस्या यह आ रही थी की कोई पॉइजन केस आते हैै तो पॉइजन वाश करने के लिए कोई व्यवस्था नही थी। अब पॉइजन रूम में व्यवस्था करवाई जा रही है।

अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर आज मुख्यमंत्री से मिल सकता है प्रतिनिधि मंडल – करीब 9 माह पुर्व 10 करोड़ के भवन में जब सिविल अस्पताल नवीन भवन मे आरंभ हुआ था। तब लोकार्पण समारोह में प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सिविल अस्पताल में बंद पडी सोनोग्राफी मशीन, स्त्री रोग विशेषज्ञ सहित विभिन्न कमियों को दुर कर इसे जिले के बेहतर अस्पताल शामिल करने की बात कही थी। लेकिन 9 माह बाद भी इस दिशा मे कोई कारगार पहल नही हो सकी। सिविल अस्पताल के नए भवन में पुराने संसाधनो से काम चलाया जा रहा है। ऐसे मे आज जिला मुख्यालय पर आ रहे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से एक प्रतिनिधी मंडल मुलाकात कर सकता है।


सूत्रों की माने तो सिविल अस्पताल में हब लैब के अभाव मे मरीजो को रिर्पोट के लिए 4 से 5 दिनो का इंतजार करना पड़ता है। वही टेक्नीशियन के नही होने से बंद पडी सोनोग्राफी मशीन और स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी जैसी कई मांगो को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत करवाया जा सकता है।

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