रिंगनोद। प्रदेश सरकार के ग्रामीण अंचलों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के दावों की जमीनी हकीकत विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली ने उजागर कर दी है। क्षेत्र में लोड शेडिंग (लोड सेटिंग) और मेंटेनेंस के नाम पर रात के समय 4-4 घंटे तक बिजली गुल की जा रही है। रात होते ही शुरू होने वाला कटौती का यह सिलसिला सुबह तक रुक-रुक कर चलता रहता है। भीषण उमस और अंधेरे के बीच क्षेत्र में चोरों की सक्रियता को लेकर ग्रामीणों में भारी दहशत और आक्रोश व्याप्त है।
बीती रात 4 घंटे छाया रहा अंधेरा, ऐन वक्त पर दी जाती है सूचना –
गुमानपुरा क्षेत्र में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात भी विभाग ने लोड शेडिंग का हवाला देकर करीब 4 घंटे तक आपूर्ति ठप रखी। पूरी रात ग्रामीण पसीने से तर-बतर होकर जागने को मजबूर रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पावर कट कर देते हैं। विभागीय सूचना समूह (ग्रुप) में भी कटौती की जानकारी ऐन वक्त पर दी जाती है, जिससे लोगों को पहले से कोई तैयारी का मौका नहीं मिलता। इसके अलावा लाइनमैनों द्वारा मेंटेनेंस के नाम पर मनमाने ढंग से जब चाहे तब सप्लाई बंद कर देने से भी लोग त्रस्त हैं।
जनप्रतिनिधियों के मौन पर सवाल –
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लोड शेडिंग या तकनीकी सुधार अनिवार्य है, तो उसे रात की जगह दिन के समय किया जाना चाहिए। रात में बत्ती गुल होने से न केवल बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों की परेशानी बढ़ रही है, बल्कि सुरक्षा का गंभीर संकट भी खड़ा हो रहा है।
आश्चर्य की बात यह है कि घंटों की कटौती से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि पूरी तरह मौन साधे बैठे हैं। किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा विभाग के खिलाफ आवाज न उठाए जाने से जनता में नाराजगी और गहरा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि विभाग की मनमानी पर जल्द अंकुश नहीं लगा, तो इसका खामियाजा सत्तापक्ष को आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता हैं।
विद्युत कार्यालय रिंगनोद के सहायक यंत्री गजेंद्र सिंह वास्केल ने कहा कि वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश अनुसार ग्रामीण क्षेत्रो में लोड शेडिंग की जा रही हैं।


















