बड़ा कस्बा, बड़ी ओपीडी लेकिन डॉक्टर सिर्फ एक : 100 से ज्यादा मरीज रोज, 60-70 प्रसव महीने में फिर भी स्टाफ की कमी, बामनिया में सीएचसी की घोषणा के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

बामनिया। बामनिया में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रोजाना 100 से अधिक मरीजों की ओपीडी, महीने में करीब 60 से 70 प्रसव और आसपास की करीब 15 बड़ी पंचायतों से आने वाले मरीजों की जिम्मेदारी—लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का भार सीमित स्टाफ के भरोसे है।

मरीजों की भीड़ बढ़ती गई, व्यवस्था नहीं –
मौसम बदलते ही सर्दी-खांसी, बुखार और बदन दर्द के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं भी बड़ी संख्या में जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र पहुंचती हैं। ऐसे में डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी का सीधा असर मरीजों के इंतजार और उपचार व्यवस्था पर पड़ने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि जब रोजाना 100 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं और महीने में दर्जनों प्रसव हो रहे हैं, तो क्या मौजूदा स्टाफ व्यवस्था पर्याप्त है?

स्थायी डॉक्टर बामनिया में, अतिरिक्त प्रभार राम का

बामनिया स्वास्थ्य केंद्र पर स्थायी रूप से पदस्थ डॉ. सुनील सूर्यवंशी की नियुक्ति बामनिया में है। 17 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत उन्हें बामनिया के साथ राम ब्लॉक का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया था।
इसी व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बामनिया खुद बड़ी आबादी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों का दबाव संभाल रहा है, ऐसे में यहां पदस्थ डॉक्टर को अतिरिक्त जिम्मेदारी दिए जाने से बामनिया की स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना असर पड़ेगा, यह गंभीर सवाल है।

15 पंचायतों के मरीजों का भी भार-
बामनिया स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ बामनिया तक सीमित नहीं है। थांदला विकासखंड की नारेला, सेमलिया, तलावड़ा, कुकड़ीपाड़ा सहित करीब 15 बड़ी पंचायतों से मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। पेटलावद और थांदला क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए यह स्वास्थ्य केंद्र महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र के रूप में काम करता है।
ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि मरीजों की संख्या और क्षेत्र की जरूरत के अनुसार यहां पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था की जाए।

सीएचसी की घोषणा के बाद भी स्टाफ की कमी का सवाल –
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा बामनिया स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की जा चुकी है। वहीं झाबुआ कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट के स्वास्थ्य केंद्र दौरे के दौरान भी मरीजों की संख्या के अनुपात में डॉक्टर और स्टाफ नर्स की कमी का मुद्दा सामने आने की बात कही गई थी।

अब सवाल यही है कि जब –
बामनिया को सीएचसी के रूप में विकसित करने की दिशा में घोषणा हो चुकी है, तो मौजूदा स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त मानव संसाधन कब उपलब्ध होगा? पूर्व मंडल अध्यक्ष संदीप मांडोत ने कहा कि ग्रामीणों को हो रही परेशानी से कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि मंत्री के संज्ञान में मामला लाकर समस्या का जल्द निराकरण करवाने का प्रयास किया जाएगा।
बामनिया सरपंच रामकन्या संजय मखोड़ ने कहा कि डॉ. सूर्यवंशी की स्थायी नियुक्ति बामनिया में है, इसलिए उन्हें बामनिया में ही सेवाएं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बामनिया बड़ा क्षेत्र है और यहां मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है। सरपंच ने यह भी सवाल उठाया कि यदि नवीन आदेशों में अटैचमेंट की व्यवस्था बंद है, तो अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। रहवासी स्वप्निल वागरेचा ने कहा कि बामनिया में थांदला और पेटलावद तहसील के मरीज बड़ी संख्या में रोजाना आते हैं और ओपीडी में मरीजों का दबाव काफी अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के दौरे के दौरान भी स्टाफ की कमी सामने आई थी।
वागरेचा ने कहा कि ऐसी स्थिति में बामनिया में पदस्थ डॉक्टर सूर्यवंशी को अन्य जगह अतिरिक्त जिम्मेदारी दिया जाना क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो ग्रामीण कलेक्टर से मुलाकात कर डॉक्टर को बामनिया में सेवाएं देने की मांग रखेंगे।

सीएमएचओ बोले—आपात व्यवस्था में दिया था अतिरिक्त प्रभार
झाबुआ सीएमएचओ डॉ. एमएल चोपड़ा ने कहा कि कुछ आपात परिस्थितियों के चलते डॉ. सूर्यवंशी की वैकल्पिक व्यवस्था राम में की गई थी। उनकी नियुक्ति बामनिया में ही है और वे बामनिया में ही अपनी सेवाएं देंगे।

बड़ा सवाल
जब मरीज 100 पार, प्रसव दर्जनों में और आसपास की 15 पंचायतों का भार बामनिया स्वास्थ्य केंद्र पर है, तो क्या मौजूदा डॉक्टर और स्टाफ व्यवस्था मरीजों की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त है? स्थानीय लोगों की नजर अब स्वास्थ्य विभाग की आगामी व्यवस्था पर है।

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