सरदारपुर। विधायक प्रताप ग्रेवाल ने गुरुवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव को पत्र लिखकर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टी.ई.टी.) की अनिवार्यता से मुक्त रखने एवं इस संबंध में निर्णय लेने हेतु विधानसभा का विशेष सत्र आहूत करने की मांग की है।
विधायक ग्रेवाल ने पत्र में उल्लेख किया कि प्रदेश में हजारों ऐसे शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 से पूर्व नियमानुसार हुई थी और जो पिछले 15-20 वर्षों से अधिक समय से पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम वर्ष 2010 में लागू हुआ था। अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टी.ई.टी.) की अनिवार्यता लागू किए जाने से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों में असुरक्षा एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है।
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने बताया कि इन शिक्षकों ने अपने सेवाकाल में लगातार विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है तथा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्षों की सेवा के बाद उन्हें पुनः पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना व्यवहारिक कठिनाइयों एवं अन्यायपूर्ण स्थिति को जन्म देता है। उन्होंने पत्र में तमिलनाडु सरकार द्वारा वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस प्रकार की अनिवार्यता से राहत देने की दिशा में विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए जाने का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश में भी शिक्षकों के हित में संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेने की मांग की।
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवं हितों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से मुक्त रखने का निर्णय लिया जाए। उक्त जानकारी विधायक कार्यालय से विष्णु चौधरी द्वारा दी गई।



















